नई दिल्ली, 1 दिसंबर - टीवी पत्रकार और लेखक सैयद जैगम इमाम के उपन्यास दोजख का विमोचन सोमवार शाम दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में किया गया। राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इस किताब का विमोचन जाने - माने साहित्यकार और हंस के संपादक राजेंद्र यादव ने किया कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी के विख्यात आचोलक नामवर सिंह ने की। इस मौके पर बोलने वालों में आईबीएन सेवन के मैनेजिंग एडीटर आशुतोष, मशहूर साहित्यकार अनामिका और शोधकर्ता शीबा असलम फहमी शामिल थीं। मंच का संचालन सीएसडीएस से जुड़े रविकांत ने किया।
रोजाना आपका सामना टीवी से लेकर अखबार तक ऐसी खबरों से पड़ता होगा जो आपको विक्षोभ से भर देती होंगी। लेकिन इसी दौरान कुछ खबरें ऐसी भी आती हैं कि जिनसे आपको ऊर्जा मिलती है और आप कहते उठते हैं कि दुनिया में अच्छाई अभी बाकी है। ऐसी ही दो खबरों के हवाले से अपनी बात कहना चाहता हूं।
अमेरिका के नेवॉर्क एयरपोर्ट (Newark Airport) पर लोकप्रिय भारतीय फिल्म अभिनेता शाहरूख खान के साथ जो कुछ हुआ वह हम भारतीयों के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने के लिए काफी है। वह नेवॉर्क जाने वाली ही अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट थी जिसके मामूली अफसरों ने पूर्व प्रेजीडेंट एपीजे अब्दुल कलाम की जमा तलाशी ली थी और उलुलजुलूल सवाल पूछे थे। लेकिन शाहरुख के साथ यह घटना अमेरिका में हुई। कलाम की घटना का पता तभी चला जब कई महीने बाद कलाम ने खुद बताया। उस घटना के बाद एयरलाइंस ने माफी मांगी और भारत सरकार ने भी कड़ा विरोध जताया लेकिन अभी तक शाहरूख के मामले में ऐसा नहीं हुआ।
आज तक इस पर कोई शोध नहीं हुआ कि दरअसल नेता नामक प्राणी की खाल कितनी मोटी होती है। अगर यह शोध कहीं हुआ हो तो मुझे जरूर बताएं - एक करोड़ का नकद इनाम मिलेगा। अब देखिए देश भर में इस मोटी खाल वाले के खिलाफ माहौल बन चुका है लेकिन किसी नेता को शर्म नहीं आ रही। कमबख्त सारे के सारे पार्टी लाइन भूलकर एक हो गए हैं और गजब का भाईचारा दिख रहा है। क्या भगवा, क्या कामरेड, क्या लोहियावादी और क्या दलितवादी एक जैसी कमेस्ट्री एक जैसा सुर।
कुछ जगहों पर हुए ब्लास्ट के सिलसिले में इंदौर से हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर बहुत सख्त प्रतिक्रिया (tough reaction) देखने को मिली। इनकी गिरफ्तारी से बीजेपी और आरएसएस के लोगों ने एक बहुत वाजिब सवाल उठाया है और उस पर देशव्यापी बहस बहुत जरूरी है।